राजभाषा

राजभाषा हिन्दी के विकास हेतु तिमाही बैठक प्राचार्य महोदय की अध्यक्षता में पूर्ण उत्साह एवं जोश के साथ सम्पन्न हुई। भाषा राष्ट्र रूपी दर्पण के सृजन का मौलिक अवयव है। इससे राष्ट्रहित की भावना प्रबल होती है। साहित्य और संस्कृति की सुरक्षा का प्रमुख दायित्व बुद्विजीवियों पर है जिनका विकासविद्यालय एवं महाविद्यालयों में होता है तथा हम सब पर यह एक नैतिक जिम्मेदारी भी है कि हिन्दी के उत्थान हेतु हम सर्वप्रथम स्वयं को इस परिधान से सुशोभित करें। अतः हमें अपना एवं विद्यालय का कार्य अधिकाधिक हिन्दी भाषा में ही करना चाहिए। कुछ प्रमुख बिन्द जिनपर सर्वसम्मति से सभीअधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपनी स्वीकृति सक्रिय रूप से दी -

1. सेवा पुस्तिकाओं एवं पंजिकाओं पर नाम हिन्दी में लिखे जाएँगे।

2.  चैक बुक रेल आरक्षण एवं दैनिक कार्यक्रम का कार्य हिन्दी भाषा में किया जाएगा |

3. छात्रों में इसके प्रति जागरुकता लाने के लिए हिन्दी भाषा के वैज्ञानिक-पक्ष को छात्रोंके सामने समय-समय पर रखा जाएगा।

4. आदेश एवं सूचना पट्ट पर भी हिन्दी भाषा में ही लिखने की प्राथमिकता दी जाएगी।

5. प्रत्येक दिन एक शब्द हिन्दी का हम सब सीखने एवं याद रखने का प्रयास करेंगे।

6.  हिन्दी भाषा के उन्नत साहित्य एवं काव्य के कुछ रोचक कविताओं से छात्रों को यथा समय अवगत कराया जाएगा।

7. अध्यापक स्वयं भी छोटी-छोटी कविताओं एवं कहानियों से छात्रों की मौलिक शक्तिमें सृजनात्मकता का कार्य कर सकते हैं।

 

प्राचार्य महोदय जी ने कहा कि राष्ट्र की एकता का सूत्र हमारी राष्ट्र भाषा हिन्दी है। यदि यह सूत्र कहीं से भी कमज़ोर हो जाए तो राष्ट्रीय एकता भी कमज़ोर हो जाए तो राष्ट्रीय एकता हेतु यह कितना हानिप्रद है इस बात को बताने की आवश्यकता नहीं है।

 

 

                                                    प्राचार्य